Tuesday, June 21, 2011

मन बावरा...


मन बावरा....भोला था...
नादान...
अतिचंचल...
मृदु....व अभिलाषी था...
आतुर था...बेगरज....
अतिव्याकुल...
नासमझ है....समझता था...
उतावला था...मर्मस्पर्शी...
अतिउत्तेजक...
बेहद...पर हद में था...
रसिक था...मस्तमौला....
अतिउत्साही...
पारखी.....कद्रदान था....
मौजूं था....अत्यंत...
अतिसरस...
सजीला...लाजवाब था...
बेहिचक था....निडर....
अतिसंवेदी...
यकीनन...मरता था
किसी पर...
मन बावरा...

चुपके से...


आंखों की मासूम शरारत देखी...
चेहरे में नटखटी शराफत देखी..
लाज़िमी था मेरा मर मिटना
शोख अदाओं में जो तेरी नज़ाकत देखी....

इक हया भरी नज़र देखी...
खुली पलकों का झपकना देखा...
जी चाहा कि जाने ना दूं...
आगोश में जो तेरा सिमटना देखा...

गर्म सांसों की शीतलता देखी...
नर्म होठों का दहकना देखा..
सोई कसक जाग उठी...
चुपके से जो तेरा बहकना देखा...

अलसुबह हवाओं में कसक देखी...
खिलते फूलों का महकना देखा...
अहसास ही काफी था तेरे होने का...
रात सपनों में जो तेरा चहकना देखा...

Tuesday, May 10, 2011

खत्म ना होनेवाली बातें..

छोटी लेकिन चुलबुली सी

मन में थी एक खलबली सी...

जानी समझी अनजानी सी...

अपनी थी पर बेगानी सी...


दस्तक देकर निकली बाहर

खामोशी की ओढ़े चादर...

कितना कुछ था समझाने को...

चंचल मन को बहलाने को...


सूने फासले, दिलचस्प कहानी

गीली छतरी, ठहरा पानी...

मन की गिरहट खोले जाता

छिछले रिश्ते...गहरा नाता...


अपनेपन सी तकरीरों में

फिर से बनती तस्वीरों में

व्यस्त दिनों की जागती रातें...

खत्म ना होनेवाली बातें..


शोखी संग संजीदा से पल

खाली मन में करते हलचल

धीरे से फिर हंसते चेहरे

चुपके से सब कहते चेहरे

Thursday, May 5, 2011

जिंदगी चाहता हूं....

ये मेरी जीत है...
संघर्षों के बाद भी
धड़कना चाहता हूं
कल भी और आज भी...

बहकने को आतुर हूं....
आंखों में शर्म भी
आवेग चाहता हूं....
अभी और ताउम्र भी....

बारिश की बूंद हूं...
जंगल सी मस्ती भी....
ताजगी चाहता हूं...
सहर भी और बस्ती भी....

हूं तो मस्तमौला...
झुरमुटों सा तंग भी
अहसास चाहता हूं...
दूर भी और संग भी....

झूमता सा चीड़ हूं...
बसंती बयार भी...
घूमना चाहता हूं...
नकद भी और उधार भी....

ख्वाबों की मुस्कान हूं...
उम्मीदों का साथ भी
जश्न चाहता हूं....
दिन भी और रात भी....

पलों की फेहरिस्त हूं...
चाहत में नफ़ासत भी....
जिंदगी चाहता हूं....
वक्त भी और बेवक्त भी...

Saturday, April 30, 2011

आगाज़ करो...

अनंत मिले...ना अंत मिले...
सबकुछ जीवनपर्यन्त मिले...
आसमां नीला...हरी प्रकृति...
जो रंग मिले, जीवंत मिले

भरपूर मिले....ना दूर मिले...
इन आंखों को नूर मिले..
काली घनघोर घटा से आगे...
इंद्रधनुषी छटा प्रचुर मिले...

करार मिले...ना रार मिले..
बेगानों से भी प्यार मिले...
हैरत और नफरत से आगे..
जो संग मिले....संसार मिले...

जो आस हो....ना नाश हो...
सबसे बेहतर प्रयास हो....
मुश्किलों की भीड़ से आगे...
कुछ कर जाने का अहसास हो...

राज करो....बे आवाज करो...
अपने निश्चय पर नाज करो....
मरघट के सन्नाटे से आगे...
गगनभेदी आगाज़ करो...

Tuesday, June 22, 2010

फुलटुस बेकारी...


बतरस में ना रस घुलता..

लतरस की अब बारी है...

बीपीएल में जीपीएल हावी...

फुलटुस बेकारी है...

फटी चादरें...पैबंद लगा..

रोजाना बढ़ती उधारी है...

खाने को अन्न भी नहीं..

फुलटुस बेकारी है...

काज बिगाड़े...फुद्दू सोंचे..

वक्त बिताने की तैयारी है...

इसकी टोपी उसके सर पे...

फुलटुस बेकारी है...

जिम-जॉगिंग के सपने आते..

रूटीन अत्याचारी है..

घुटने छिलते...बाम नहीं है..

फुलटुस बेकारी है...

व्यस्त इतने की वक्त नहीं है...

बेवजह की लाचारी है...

कहते कुछ हैं करते कुछ हैं..

फुलटुस बेकारी है...

कान खुजाएं...तिकड़म सोंचे..

नैतिक जिम्मेवारी है..

भले बुरे में टांग खींचते..

फुलटुस बेकारी है...

Tuesday, June 8, 2010

आज खुश हूं मैं...


आज खुश हूं मैं...
मस्तमौला..
निश्चल..
अविरल...
बहना चाहता हूं..
आवेग में..
मिटना चाहता हूं..
आवेश में...
बाहें पसारे..
उड़ना चाहता हूं...
सरस हूं...
मनमोहक..
संकोची..
संवेदनाओं के साथ..
लक्ष्य को आतुर..
मत्स्य नयन से इतर..
एकाकार..
समृद्ध..
नहीं बदल सकता..
खुद को...
जीत चुका हूं....
कल को..
कल नहीं चाहता
आज में खुश हूं...
आज खुश हूं..मैं...